मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा सुनाने से पहले जज ने क्यों किया महाभारत का जिक्र? बाघ और जंगल की कहानी सुनाई, फिर पेन फेंका

मेरठ: पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाने वाले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा का अदालत में दिया गया बयान चर्चा में है। सजा सुनाने से पहले उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए न्याय और दंड के सिद्धांत पर बात की। इस दौरान उन्होंने बाघ और जंगल का उदाहरण देकर कानून और समाज के संबंध को समझाया। फैसला सुनाने के बाद जज ने जिस पेन से आदेश लिखा था, उसे कूड़ेदान में डाल दिया। उनके इस कदम ने भी लोगों का ध्यान खींचा है।

करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 तारीखों के बाद आया फैसला

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत में करीब 13 महीने तक मुकदमा चला। इस दौरान कुल 126 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद जिला जज ने मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी ठहराते हुए 14 अक्टूबर को दोनों को फांसी की सजा सुनाई। मेरठ में करीब 23 साल बाद किसी मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने के कारण भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है।

महाभारत का जिक्र कर जज ने क्या कहा?

मृत्युदंड पर फैसला सुनाने से पहले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का संदर्भ दिया। उन्होंने अपराध के अनुरूप दंड देने को न्यायिक धर्म से जोड़ते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य समाज में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना भी है। अदालत में उनके कथन का मुख्य जोर न्याय, दंड और सामाजिक सुरक्षा के महत्व पर रहा।

बाघ और जंगल की कहानी से समझाया कानून का महत्व

जज ने बाघ और जंगल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर बाघ जंगल में है, तो जंगल सुरक्षित है और अगर जंगल बचा है, तो बाघ भी सुरक्षित है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने कानून और समाज के आपसी संबंध को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कानून मनुष्यों के लिए बनाया गया है, उनकी सुरक्षा करता है और उनके व्यवहार को नियंत्रित करता है। समाज तक यह संदेश पहुंचना जरूरी है।

फांसी का आदेश सुनाने के बाद पेन कूड़ेदान में डाला

अदालत में सजा सुनाए जाने के बाद जिला जज का एक और कदम चर्चा में आ गया। उन्होंने आदेश सुनाने के लिए इस्तेमाल किए गए पेन को कूड़ेदान में डाल दिया। चूंकि यह मामला दो दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने से जुड़ा था, इसलिए इस घटना पर लोगों का ध्यान गया। हालांकि, जज ने पेन को कूड़ेदान में डालने के पीछे कोई आधिकारिक वजह बताई हो, ऐसी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में उनके इस कदम के पीछे किसी खास मंशा का दावा नहीं किया जा सकता।

पांच महीने पहले ही मेरठ में संभाला था पदभार

जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा को मेरठ में पदभार संभाले करीब पांच महीने हुए हैं। उन्होंने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके लगभग दो सप्ताह बाद 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया। इस चर्चित मामले में फैसला आने के बाद जज का अदालत में दिया गया बयान भी सुर्खियों में आ गया है।

क्या था मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर सौरभ राजपूत की हत्या करने और शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में छिपाने का आरोप था। इस वारदात ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। इस मामले में दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया है। मेरठ में इससे पहले वर्ष 2003 में एक डॉक्टर को मौत की सजा सुनाई गई थी। करीब 23 साल बाद मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड दिए जाने से यह फैसला एक बार फिर चर्चा में है।

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